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सामान्य अध्ययनः एक परिचय (General Studies: An Introduction)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, सामान्य अध्ययन किसी खास विषय का गहरा अध्ययन न होकर विभिन्न विषयों का ऐसा अध्ययन है जिसके लिये किसी अनुसंधान या विशेषज्ञता की जरूरत नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा से सम्बंधित अपनी अधिसूचना में सामान्य अध्ययन का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखा है-

“सामान्य अध्ययन में ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे जिनके उत्तर एक सुशिक्षित व्यक्ति बिना किसी विशेषज्ञतापूर्ण अध्ययन के दे सकता है। ये प्रश्न बहुत से ऐसे विषयों में उम्मीदवार की जानकारी या जागरूकता का स्तर जाँचने के लिये पूछे जाएंगे जिनकी प्रासंगिकता सिविल सेवाओं में कार्य करने के दौरान होती है। प्रश्नों के माध्यम से सभी प्रासंगिक मुद्दों पर उम्मीदवार की मूल समझ परखने के साथ-साथ इस बात की भी जाँच की जाएगी कि उसके पास परस्पर विरोधी सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों तथा मांगों के विश्लेषण की कितनी योग्यता है।”

देखा जाए तो यूपीएससी द्वारा की गई यह घोषणा सिर्फ औपचारिक महत्त्व की है, सच्चाई यह है कि सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में प्रायः इतने कठिन और गहरे स्तर के प्रश्न पूछे जाते हैं कि उस विषय के विशेषज्ञ भी उनका उत्तर नहीं दे पाते।

पाठ्यक्रम की चुनौतियाँ (Challenges of Syllabus)

सामान्य अध्ययन का पाठ्यक्रम इतना विस्तृत और समावेशी है कि उसे गम्भीरता के साथ कम-से-कम एक वर्ष का समय देना जरूरी है। हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिये तो सामान्य अध्ययन दोहरी चुनौती पेश करता है। एक तरफ अंग्रेजी की तुलना में हिंदी में उपलब्ध अध्ययन-सामग्री बहुत अच्छी नहीं होती है तो दूसरी तरफ कुछ परीक्षकों का हिंदी भाषा में सहज न होना भी हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों को नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिये हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को अपनी तैयारी में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

अगर आप सचमुच आई-ए-एस- या सिविल सेवक बनना चाहते हैं तो सामान्य अध्ययन को पूरे विस्तार और गहराई से पढ़े बिना आपका अपनी मंजिल तक पहुँचना आसान नहीं है।

तैयारी की उचित रणनीति क्या होनी चाहिये? (What should be the appropriate strategy for the preparation?)

भिन्न-भिन्न अकादमिक पृष्ठभूमि होने की वजह से तैयारी की रणनीति सभी के लिये एक जैसी नहीं हो सकती। उदाहरण के लिये, अगर किसी उम्मीदवार ने इतिहास, भूगोल और राजनीति विज्ञान के साथ स्नातक स्तर की पढ़ाई की है किन्तु उसे विज्ञान पढ़ने व समझने में समस्या होती है तो उसकी रणनीति अलग तरह से बनेगी, वहीं कुछ उम्मीदवार ऐसे भी होंगे जो इंजीनियर या डॉक्टर होने के कारण विज्ञान में अत्यंत सहज हैं लेकिन उनका मन इतिहास या राजनीति विज्ञान की पुस्तक को देखने का भी नहीं होता। स्वाभाविक ही है कि इनकी रणनीति अलग तरीके से बनेगी। मोटे तौर पर, रणनीति के सम्बंध में कुछ सुझाव ये हो सकते हैं–

  • सभी खंडों पर बराबर बल देने की बजाय कुछ चुने हुए खंडों पर अधिक बल देना चाहिये। उम्मीदवार को कम-से-कम इतने खंड चुन लेने चाहियें जिनसे सम्मिलित रूप से 80-85 प्रश्न आने की प्रवृत्ति दिखाई पड़ती हो ताकि गम्भीर तैयारी से लगभग 65-70 प्रश्न सही किये जा सकें। हालाँकि, शेष खंडों को छोड़ देना अच्छी बात तो नहीं है, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा नजदीक होने पर आपात योजना के रूप में इसे ठीक माना जा सकता है।
  • अगर आप ध्यान से पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का अवलोकन करें तो पाएंगे कि सभी खंडों के अंदर कुछ विशेष उप-खंडों से प्रायः ज्यादा प्रश्न पूछे जाने की प्रवृत्ति होती है। इसलिये बेहतर यही रहेगा कि उन उप-खंडों पर ज्यादा समय दें। उदाहरण के लिये, इतिहास खंड के अंतर्गत दो उपखंडों से अधिक प्रश्न पूछे जाने की प्रवृत्ति दिखती है– एक तो स्वतंत्रता आंदोलन से, और दूसरा कला व संस्कृति से। अगर इन दोनों खंडों को ठीक से पढ़ लिया जाए तो इतिहास के लगभग 85-90% प्रश्न मिल जाने चाहियें। इसी तरह, कला व संस्कृति के अंतर्गत प्राचीन भारत पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये।
  • गौर करने वाली एक अन्य बात यह है कि ज्यादा मेहनत उन खंडों के लिये करनी चाहिये जो मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं।इससे मुख्य परीक्षा में सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिये, इतिहास खंड को देखें तो आधुनिक भारत का इतिहास मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल है, अतः प्रारंभिक परीक्षा में आधुनिक भारत का इतिहास विस्तारपूर्वक पढ़ने पर मुख्य परीक्षा में भी बेहतर परिणाम की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • ध्यान देने वाली एक बात यह भी है कि सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम के जो खंड सिर्फ मुख्य परीक्षा में पूछे जाते हैं, उन्हें प्रारंभिक परीक्षा के लिये शेष बचे दो-ढाई महीनों में न पढ़ा जाए। इन खंडों में विश्व इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय सम्बंध, सामाजिक न्याय, आंतरिक सुरक्षा तथा एथिक्स शामिल हैं।
  • यह मानकर भी चलना चाहिये कि उम्मीदवार चाहे जितनी भी तैयारी कर ले, हर खंड में कुछ-न-कुछ ऐसे प्रश्न अवश्य होंगे जो उसकी जानकारी की परिधि से बाहर के होंगे। आप जिस भी खंड की तैयारी गम्भीरता से करें, लक्ष्य यह रखिये कि उसके 70-80% प्रश्न आपसे हल हो जाएँ। अगर आप किसी खंड के सभी प्रश्नों को सही करने के फेर में पड़ेंगे तो एक ही खंड की तैयारी में अनुत्पादक तरीके से बहुत समय नष्ट कर देंगे।
  • सामान्य अध्ययन की तैयारी में इस बात का ध्यान अवश्य रखा जाए कि इसमें सभी खंडों के प्रश्न काफी गहरे स्तर के होते हैं और वे विषय की सूक्ष्म समझ की मांग करते हैं। सामान्यतः हर प्रश्न में कुछ तथ्य या कथन देकर उनके संयोजन से जटिल विकल्प बनाए जाते हैं ताकि स्थूल समझ वाले उम्मीदवार सफल न हो सकें। उदाहरण के लिये, अधिकांश प्रश्नों में शुरुआत में 3-4 कथन या तथ्य दिये जाते हैं, जिनमें से कुछ सही होते हैं और कुछ गलत। प्रायः ऐसा होता है कि उम्मीदवार उनमें से कुछ तथ्यों से परिचित होता है और कुछ से नहीं। उसके बाद, उन तथ्यों को आपस में जोड़कर उम्मीदवार को 4 कठिन विकल्प दिये जाते हैं, जैसे (i) कथन 1, 3 तथा 4 सही हैं और कथन 2 गलत, (ii) कथन 1, 2 तथा 4 सही हैं और कथन 3 गलत। उम्मीदवार को ऐसे कठिन विकल्पों में से एक सही विकल्प चुनना होता है। इसमें प्रश्न के गलत होने का खतरा तो रहता ही है, साथ में कठिन विकल्पों के चलते प्रश्नों को हल करने में अधिक समय भी लगता है और अंत में समय-प्रबंधन खुद एक समस्या बन जाता है।

इस समस्या का समाधान करने का बेहतर तरीका यह है कि सबसे पहले वही प्रश्न किये जाएँ जो उम्मीदवार की जानकारी के दायरे में हों, उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए। बीच-बीच में जो प्रश्न नहीं आते हैं अथवा जिन पर गहरा अध्ययन नहीं है, उन्हें निशान लगाकर छोड़ देना चाहिये और अगर अंत में समय बचे तो उनका उत्तर देने का प्रयास करना चाहिये, अन्यथा उन्हें छोड़ देने में ही भलाई है।

सीसैट (CSAT)

सीसैटएक परिचय (CSAT: An Introduction)

प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र-2 को ‘सीसैट’ (CSAT) यानी ‘सिविल सेवा अभिवृत्ति परीक्षा’ (Civil Services Aptitude Test) कहे जाने का प्रचलन है।

‘सीसैट’ पेपर वस्तुतः उम्मीदवार की बौद्धिक क्षमता (IQ-Intelligence Quotient), की जाँच करता है। इस पेपर में प्रश्नों की प्रकृति एवं अनुपात को सिविल सेवाओं या प्रशासन की आवश्यकताओं के अनुरूप निर्धारित किया गया है। उदाहरण के तौर पर, इसमें प्रशासन की समस्याओं से जुड़े निर्णयन व समस्या समाधान (Decision Making & Problem Solving) के कुछ प्रश्न होते हैं जो प्रबंधन (Management) की समस्याओं से भिन्न प्रकृति के होते हैं।

कुल मिलाकर, ‘सीसैट’ बौद्धिक योग्यता (Intelligence Quotient) की एक परीक्षा है जो विशेष रूप से सिविल सेवाओं या प्रशासन के लिये आवश्यक बौद्धिक क्षमताओं का परीक्षण करने के उद्देश्य से प्रस्तावित की गई है।

सीसैट की भूमिका (Role of CSAT

जैसा कि हम शुरुआत में ही चर्चा कर चुके हैं, प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट प्रश्नपत्र अर्हकारी प्रकृति (Qualifying Nature) का होता है। किसी भी उम्मीदवार को प्रारंभिक परीक्षा पास करने के लिये सीसैट में 33% अंक प्राप्त करने होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट पेपर में 80 प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें प्रत्येक प्रश्न के लिये 2-5 अंक निर्धारित होते हैं और इस तरह सीसैट प्रश्नपत्र कुल 200 अंकों का होता है। किसी भी अभ्यर्थी को सीसैट के 200 अंकों में से 66 अंक प्राप्त करने अनिवार्य होते हैं यानी उसे नकारात्मक अंकन (Negative Marking) के लिये काटे गए अंकों के बाद 66 अंक प्राप्त करने होते हैं। इसके लिये उसे 80 प्रश्नों में से लगभग 27 प्रश्न (नकारात्मक अंकन द्वारा काटे गए प्रश्नों के बाद) सही करने होते हैं।

इसलिये, अगर कोई उम्मीदवार सीसैट पेपर में 33% अंक प्राप्त नहीं कर पाता है तो उसे फेल माना जाएगा, फिर चाहे उसने सामान्य अध्ययन में कितना भी अच्छा प्रदर्शन क्यों न किया हो।

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